जिला सक्ती-छत्तीसगढ़
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पत्रकार योम प्रकाश लहरे ने गुरु की महत्व को बताया , गुरु के मार्गदर्शन से जीवन सफल रहता है
संस्कृत का एक शब्द है गुरू और इस छोटे से शब्द का जीवन में बड़ा महत्व है। बात इसके शाब्दिक अर्थ की करें तो गुरू शब्द गु और रू से मिलकर बना है। 'गु' जिसका मतलब अंधकार और 'रू' यानी प्रकाश होता है। इस प्रकार गुरू वह होता है जो जीवन में फैले अंधकार को मिटाये और ज्ञान का प्रकाश फैलाए। इस प्रकार हम देखते हैं कि जीवन में गुरू का अति महत्वपूर्ण स्थान होता है। गुरू हमें न केवल शिक्षा देते हैं बल्कि हमें सही व गलत में अंतर करना सिखाते हैं। वे हमारे चरित्र, सोंच व व्यवहार को सही दिशा में ले जाते हैं। जिससे व्यक्ति को सही मार्गदर्शन, नैतिक संस्कार व आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। गुरू का मार्गदर्शन हमें जीवन में आने वाली कठिनाईयों का सामना करने की शक्ति देता है। गुरू शब्द के महत्व को महान संत व समाज सुधारक कबीरदास ने अपने इस दोहे में खुब रेखांकित किया है। कबीरदास जी ने कहा "गुरू गोविन्द दोऊ खड़े काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए।। संत कबीर ने गुरू और गोविंद अर्थात भगवान की तुलना करते हुए कहा कि गुरू और भगवान दोनों साथ खड़े हों तो पहले गुरू के चरण छूने चाहिए क्योंकि गुरू ने ही हमें ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता दिखाया है। इसी प्रकार संस्कृत के एक और श्लोक "गुरू ब्रम्हा गुरू विष्णु गुरू देवो महेश्वरा। गुरू साक्षात परम ब्रम्ह तस्मै श्री गुरुवे नम:।" में भी गुरू की महत्ता को प्रदर्शित किया गया है। इस श्लोक में बताया गया है कि गुरू ब्रम्हा के रूप में नव ज्ञान व जीवन की रचना करते हैं। विष्णु के रुप में गुरू ज्ञान की रक्षा करने के साथ पालन पोषण भी करते हैं। वहीं गुरू महेश्वर के रूप में हमारे अंदर के अज्ञान और बुरे गुणों का नाश भी करते हैं। इसलिए गुरू कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि साक्षात परब्रह्म परमात्मा का ही रूप है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि हमारा जीवन गुरू के बताए ज्ञान से सजता व संवरता है। जिससे जीवन बेहतर से बेहतर बनता है। शायद यही वजह रही होगी कि जब ईश्वर भी धरती में आए तब उन्हें भी शिक्षा -दीक्षाके लिए गुरू की शरण लेनी पड़ी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने जहां महर्षि वशिष्ठ व महर्षि विश्वामित्र से शिक्षा ग्रहण किया तो वहीं गीता का उपदेश देने वाले भगवान श्रीकृष्ण ने भी गुरू सांदिपनी के आश्रम में शिक्षा पाई थी। इस प्रकार गुरू के बताए ज्ञान व उचित मार्गदर्शन से ही जीवन बेहतर बना है फिर बात महात्मा बुद्ध की हो या फिर महावीर स्वामी, गुरू नानक, गुरू रविदास, संत गुरू कबीर साहेब की या फिर हमारे अपने छत्तीसगढ़ प्रदेश में जन्मे महान संत गुरू बाबा घासीदास की हो सभी ने अपने ज्ञान से समाज में फैले अंधकार को मिटाया है। लोगों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाया है। इन संतों गुरूओं के बताये ज्ञान की रौशनी इतनी तेज है कि आज उनके इस जहां से रूखसत होने के हजारों साल बाद भी हमारा जीवन उसके प्रकाश से जगमग है। इसलिए हमें अपने जीवन को हमेशा सदगुरु के सानिध्य में रखने चाहिए ताकि उनके ज्ञान की रौशनी से हमारा जीवन सराबोर रहे और हम सभी दिशा की अग्रसर होते रहें......

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