जिला सक्ती-छत्तीसगढ़
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ग्राम मालखरौदा में सभी सुहागिन महिलाओं ने वटवृक्ष के नीचे इकट्ठा होकर पूजा-अर्चना की, परिक्रमा की और अपने पति की लंबी उम्र की कामना की।

वट सावित्री पूजा किस लिए करते हैं?
1. मुख्य उद्देश्य: पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य
वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से पति पर आने वाला हर संकट टल जाता है और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
2. पौराणिक कथा – सावित्री और सत्यवान
ये पूजा सती सावित्री की याद में की जाती है:
- सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस मांगे थे।
- जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जा रहे थे, तो सावित्री वटवृक्ष के नीचे बैठकर यमराज के पीछे चलती रही।
- सावित्री के धर्म, पतिव्रता और बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर यमराज को सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े।
- जिस वृक्ष के नीचे ये घटना हुई वो वटवृक्ष यानी बरगद था। इसलिए बरगद की पूजा होती है।
3. वटवृक्ष यानी बरगद की पूजा क्यों?
- अमर वृक्ष: बरगद सबसे लंबी उम्र वाला पेड़ है। इसकी जटाएं नई-नई निकलती हैं। इसे अक्षयवट कहते हैं। जैसे वटवृक्ष अमर है, वैसे ही पति की उम्र अमर हो जाए – ये कामना है।
- त्रिदेव का वास: मान्यता है बरगद में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों का वास है। जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु, शाखाओं में शिव।
- संतान सुख: बरगद की तरह परिवार भी बढ़ता-फूलता रहे, इसकी प्रार्थना की जाती है।
4. पूजा में क्या करते हैं? – मालखरौदा की परंपरा
- व्रत: महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं।
- सोलह शृंगार: नई साड़ी, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर लगाकर पूजा करती हैं।
- परिक्रमा: कच्चे सूत/मोली को वटवृक्ष के चारों ओर लपेटकर 7 या 108 बार परिक्रमा करती हैं।
- भोग: भीगे चने, गुड़, खरबूजा, आम चढ़ाते हैं।
- कथा सुनना: सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं।
- बड़ों का आशीर्वाद: सास-ससुर के पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं।

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