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जमीनी हकीकत : डायल 1930 हेल्पलाइन और साइबर सेल ऑफिस वाले कर रहे है आम जनता को गुमराह

May 27, 2026 by Amir Raja Banjare

जिला सक्ती-छत्तीसगढ़

प्रदेश मीडिया प्रभारी अमीर राजा के साथ संभाग रिपोर्टर शिवा यादव जिला रिपोर्टर श्रद्धा बर्मन अनंत कुमार चौधरी, नरेश यादव, रामकिशन चंद्रा महेश सिदार, रुखसाना महेश।


क्रांतिकारी संवाददाता सक्ती – अपने मोबाइल को हैंग होने पर पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि अपनी शिकायत दर्ज करवाने हेतु वह साइबर सेल के ऑफिस पर गया था परंतु वहां के इंचार्ज ऑफिसर ने बोला कि आपका कोई भी जब तक फाइनेंशियल शिकायत नहीं होगी तब तक आपकी शिकायत दर्ज नहीं की जा सकेगी आप अपना आवेदन लेकर जिला पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में जाएं उधर मेरे मोबाइल से हैंग करने वाले व्यक्ति ने मेरे पूरे परिवार के रिश्तेदारों से पैसों की मांग करना शुरू कर दिया था बहुत से रिश्तेदारों ने उन्हें पेमेंट भी कर दिया था और हैंगर के द्वारा बार-बार पैसों की डिमांड की जा रही थी परंतु इस बारे में साइबर सेल ने किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही करने के लिए उचित नहीं समझा सरकार द्वारा नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजेक्शन करने को प्रोत्साहित किया गया जिसके कारण डिजिटल ट्रांजेक्शन, यूपीआई पेमेंट में भारी इजाफा हुआ, इसके परिणाम स्वरूप साइबर चोरों के द्वारा डिजिटल अकाउंट हैकिंग और डिजिटल चोरी , लोगों को नए-नए तरीकों से बेवकूफ बनाकर उनके मोबाइलों को हैक कर लेना और स्वयं ओटीपी पासवर्ड को अपने पास से देखते हुए पैसे ट्रांसफर कर लेना एवं ना ना प्रकार की हैकिंग के नए-नए तरीकों से पैसों की चोरी बढती जा रही है, जिसकी रोकथाम के लिए छत्तीसगढ़ में लगभग 2022 में डायल 1930 साइबर हेल्पलाइन और 2023 में साइबर थाना का गठन हुआ।
वर्तमान में जब किसी व्यक्ति के साथ उसके मोबाइल में हैकर द्वारा कॉल करके,व्हाट्सएप में मैसेज भेज कर, एपीके फाइल भेज कर, वीडियो कॉल स्क्रीन शेयरिंग करके एवं हर दिन नए तरीकों लोगों के मोबाइल को हैक कर लिया जाता है और वहीं पर अपने घर बैठे बैठे उस मोबाइल को ऑपरेट किया जाता है, उसके मैसेज को रीड किया जाता है, जहां तक हो सके व्यक्ति को गुमराह करते हुए उसके अकाउंट से पैसा ट्रांसफर करने की कोशिश की जाती है और अधिकांशत सफल भी हो जाते हैं उसके बाद उस मोबाइल में से उसके फोन बुक में जितने भी नंबर सेव है , उनको पीड़ित के व्हाट्सएप नंबर से ही मैसेज भेज कर परिचितों का भी शिकार किया जाता है।

पीड़ित व्यक्ति के साथ साइबर हेल्पलाइन और साइबर थाना के द्वारा गुमराह
अब विडंबना यह है कि पीड़ित व्यक्ति जिसके साथ फ्रॉड हुआ है वह पहले ही डरा सहमा हुआ है। 10 में से पांच लोग हिम्मत जुटाकर अपने साथ हुए फ्रॉड की शिकायत लिखवाने के लिए थाना पहुंचते हैं तो इन्हें साइबर सेल में जाने को कहा जाता है और जब साइबर सेल पहुंचते हैं तो वहां बैठे कर्मचारियों के द्वारा बताया जाता है कि अभी साइबर थाना का सक्ती जिले में अलग से शुभारंभ नहीं हुआ है उनके द्वारा एसपी ऑफिस में आवेदन या पुनः थाने में जाने को कहा जाता है, 1930 पर कॉल करने पर अगर यदि फाइनेंशियल फ्रॉड कंप्लीट नहीं हुआ है तो वहां पर शिकायत दर्ज नहीं होगी उसके द्वारा फिर पुनः थाने जाने को कहा जाता है। और नए-नए तरीकों से पीड़ित को गुमराह कर उसका हौसला तोड़ दिया जाता है ताकि वह शिकायत दर्ज न हो पाए। उसे लास्ट में केवल यही समझाया जाता है कि कि सतर्कता ही सुरक्षा है, प्रतिदिन बहुत सारे धोखाधड़ी हो रही है, जिस नंबर से धोखाधड़ी हुई है और जिस अकाउंट में पैसा ट्रांसफर हुआ है वह मोबाइल नंबर एवं अकाउंट किसी मजदूर के नाम पर होगा या किसी गरीब के नाम पर होगा,अन्य राज्यों में होगा, किसी ने किराए पर दे रखा होगा, जिसे पकड़ कर लाने पर भी कोई फायदा नहीं होगा। अंततः पीड़ित व्यक्ति हार कर घर वापस चला जाता है।
फर्स्ट अकाउंट में पैसा होल्ड हो जाने के बाद भी पैसे वापस लेने में समस्या

                                            फाइनेंशियल फ्रॉड हो जाने के बाद जब फर्स्ट अकाउंट में पैसा ट्रांसफर होता है और पीड़ित व्यक्ति के द्वारा तुरंत शिकायत करने पर कुछ पैसा होल्ड भी हो जाता है, उस पैसा को निकलवाने के लिए थाना कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं और कोर्ट के आदेश हो जाने के बाद भी कई बार पैसा निकाल नहीं पाता है, अब यह दूसरे राज्यों में फंसे हुए होने के कारण समस्या हो ,बैंक की कोई समस्या हो, या फिर साइबर सेल के द्वारा प्रक्रिया अपनाने में देरी की जा रही है। इसका कोई मजबूत तंत्र बनाना चाहिए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

पीड़ित जनता का शासन से सवाल

                                          इसमें आम जनता का या पीड़ित पक्ष का कहना है कि अगर साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करना ही नहीं है तो फिर डायल 1930 हेल्पलाइन नंबर ,साइबर सेल थाना जगह-जगह खोलकर क्यों रखे हुए हैं, आम जनता को झूठा दिलासा क्यों दिलाया जा रहा है। सीधा-सीधा कह दे की डिजिटल पेमेंट, अकाउंट में मोबाइल नंबर लिंकिंग , विभिन्न यूपीआई ऐप जैसे फोन पे , पेटीएम इत्यादि सब बंद कर दे।

इस पर जब शासन और आम जनता के बीच वार्तालाप हो रही थी तब एक उच्च अधिकारी ने कहा था कि व्हाट्सएप, ट्विटर, फेसबुक और नाना प्रकार के ऐप जिनकी सहायता से साइबर फ्रॉड हो रहा है वह सब विदेशी ऐप है जिसे हम कुछ नहीं कर सकते, कई विदेश ऐसे हैं जहां पर साइबर धोखाधड़ी की ट्रेनिंग दी जा रही है और उन्हें वहां सपोर्ट किया जाता है।
इस पर जनता का कहना है कि जिस पहले अकाउंट में पैसा ट्रांसफर होता है उसे पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि वह व्यक्ति थोड़े से पैसों की लालच में या जानबूझकर अपना अकाउंट ना दे, क्योंकि बैंक में अकाउंट खुलवाने के लिए उसे अपनी आईडी प्रूफ , एड्रेस प्रूफ और समस्त दस्तावेजों की जानकारी देनी होती है और पुराने बैंक अकाउंट में केवाईसी इत्यादि वेरिफिकेशन की प्रक्रिया है इसका मतलब अकाउंट जिसमें पैसा गया है वह कहीं ना कहीं तो वह व्यक्ति है तो उसे पकड़ा क्यों नहीं जाता, वह बतायेगा कि उसने किराये पर दिया है ? किसी ने धोखे से लिया है ? किसको दिया है ? और इसका प्रचार किया जाए कि पहले अकाउंट के ऊपर कड़ी कार्रवाई होगी सोच समझ कर अकाउंट खुलवाना या किराए पर देना।
आम जनता की भारत सरकार एवं राज्य शासन से मांग है कि साइबर फ्रॉड हुए व्यक्ति को गुमराह ना किया जाए, उसकी जैसे भी शिकायत हो तुरंत दर्ज की जाए, शिकायत दर्ज न करने वाले शासकीय सेवकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। अगर इन विदेशी ऐप से होने वाले धोखाधड़ी को हम रोक नहीं सकते तो भारत में विदेशी ऐप को बंद करते हुए स्वदेशी ऐप बनाया जाए ताकि धोखाधड़ी कम हो और कोई करें तो उसे पकड़ सके।

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